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बाल्य से युवा अवस्था में आ गया है आनंद विभाग: मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस हैंड होल्डिंग और मेंटरशिप के भाव के साथ काम करें मास्टर ट्रेनर

 छतरपुर। आनंद भवन भोपाल में पूरे प्रदेश के 78 मास्टर ट्रेनर्स के साथ आनंद विभाग की गतिविधियों पर चर्चा करते हुए आनंद विभाग के संस्थापक सदस्य एवं मप्र शासन के मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस ने कहा कि 2016 में स्थापित आनंद विभाग की यात्रा बाल्य अवस्था से युवा अवस्था तक हो गई है। अब अंगुली पकड़कर चलाने की जरूरत नहीं है। आप सभी इसे इंडिपेंडटिली चलाइए। इस कार्यक्रम में आनंद विभाग के प्रमुख सचिव संजीव कुमार झा, राज्य आनंद संस्थान के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अखिलेश कुमार अर्गल, सलाहकार सत्यप्रकाश आर्य, मनु दीक्षित, कमलेश कुमार तिवारी, जितेश श्रीवास्तव, प्रदीप महतों, मुकेश करूआ आदि प्रमुख रूप से उपस्थित थे। आनंद विभाग की स्थापना के समय से काम कर रहे मास्टर ट्रेनर लखनलाल असाटी, रमेश कुमार व्यास, बलवीर सिंह बुन्देला, राजेन्द्र असाटी आदि को उन्होंने उपस्थित पाकर प्रसन्नता व्यक्त की।

श्री बैंस ने कहा कि जब आनंद विभाग की स्थापना की जा रही थी तब यह स्पष्ट नहीं था कि सही रास्ता क्या है। अब आप सभी हैंड होल्डिंग और मेंटरशिप के भाव के साथ प्रदेश भर के आनंदकों को अपने साथ जोड़ें। उन्होंने मास्टर ट्रेनर्स  से कहा कि उन्हें अपनी खुद की प्रोसेस पर फोकस कर उसे फील कराने की जरूरत है। जहां भी आप काम कर रहे हैं उस गु्रप के साथ आपके जीवंत संबंध होने चाहिए। उन्होंने कहा कि आपको आनंद का स्वाद लग गया है। अब इसे बूंद-बूंद करके बांटते रहिए तो यह समुद्र बन जाएगा। नहीं बांटोगे तो आप एक पिंजरे में चले जाओगे।
श्री बैंस ने कहा कि आनंद विभाग का बजट सबसे छोटा है। यदि गुणात्मक प्रभाव के लिए संसाधनों की जरूरत है तो हमें और अधिक बजट देने में कोई दिक्कत नहीं है पर संसाधनों का मीनिंगफुल  डिप्लायमेंट होना चाहिए। उन्होंने कहा कि भाषा के उपयोग की समस्या कई बार बड़ी हो जाती है हम प्रोसेस की बात करते हैं पर वास्तव में किसी भी चीज की सार्थकता तभी है जब वह प्रयोग और प्रेक्टिस में हो। उन्होंने कहा कि फिजिक्स की किताब पढ़कर फिजिक्स सीख सकते हैं पर आनंद की किताब पढ़कर आनंद नहीं सिखाया जा सकता। साईकिल चलाना या तैराकी करना सिर्फ किताबें पढ़ लेने से नहीं आ जाएगा।
कहीं हम खुद को प्रभावित करने के चक्कर में तो नहीं लगे हैं
श्री बैंस ने कहा कि कहीं हम चेतन और अचेतन माइंड से मंच और सेशन के दौरान धोखा देने का प्रयास तो नहीं कर रहे हैं। क्योंकि माइंड इतना जटिल है कि कई बार वह खुद को प्रभावित करने के चक्कर में लग जाता है। उन्होंने आगाह किया कि यदि ऐसा करेंगे तो जिस लाभ से आप वंचित रहेंगे वह आपका बड़ा नुकसान होगा। श्री बैंस ने मुरैना के सुधीर आचार्य, छिंदवाड़ा की साक्षी सहारे तथा कटनी के अनिल काम्बले के विचारों को सुनने के बाद कहा कि जिलों में किए जा रहे अनूठे प्रयोगों को संस्थागत स्वरूप प्रदान करने की संभावनाओं पर दस्तावेजीकरण किया जाना चाहिए। कॉलेज अपने आप में अल्पविराम के लिए बहुत बड़ा मंच है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक जिले में एक ऐसा आनंद उत्सव भी आयोजित हो जिसमें सरकारी मदद न ली जाए। प्रमुख सचिव संजीव कुमार झा ने अल्प विराम को महत्वपूर्ण कार्यक्रम बताते हुए कहा कि अगर सरकारी अधिकारी कर्मचारी की खुशी बढ़ेगी तो वह अपने विभाग में अच्छा काम करेंगे। मार्च के पहले तक प्रत्येक जिले में पूरे एक दिन के कम से कम 5 अल्प विराम सेशन आयोजित होने चाहिए। आभार प्रदर्शन लखनलाल असाटी ने किया। 




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