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कोरोना को हराने के लिए जरुरी है मन की मजबूती- डॉ अमित गर्ग मानसिक मजबूती से बढ़ती है रोग प्रतिरोधक क्षमता- डॉ अमित गर्ग

  पं गणेश प्रसाद मिश्र सेवा न्यास द्वारा आयोजित परिचर्चा में डॉ. अमित गर्ग ने बताए तनाव से बचने के उपाय 


 *पं. गणेश प्रसाद मिश्र सेवा न्यास की 15 वीं स्वास्थ्य परिचर्चा संपन्न * 


*नई दिल्ली/सतना/छतरपुर *। कोरोना महामारी का असर अब लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ने लगा है। घरों में कैद रहते हुए सेहत से लेकर आजीविका की चिंता लोगों के दिमाग पर असर डाल रही है। लोग एक अजीब तरह के भय, तनाव और अवसाद से ग्रसित हो रहे हैं। इसकी एक बड़ी वजह जरुरत से अधिक मिलने वाली गैर जरुरी सूचनाएं भी हैं। कोरोना की जंग में जीत के लिए लोगों का मानसिक रूप से स्वस्थ होना बेहद जरुरी है। मानसिक स्वास्थ्य के महत्व को समझते हुए पं. गणेश प्रसाद मिश्र सेवा न्यास द्वारा 15वीं स्वास्थ परिचर्चा कोविड महामारी काल में मानसिक बीमारी व डिप्रेशन के उपचार- घरेलू सावधानियों द्वारा तनाव से बचें विषय पर आयोजित की गई थी। 15 मई शनिवार को आयोजित इस परिचर्चा में देश के प्रसिद्ध युवा मनोचिकित्सक डॉ अमित गर्ग (एमडी) पूर्व सहायक प्राध्यापक (इंस्टीट्यूट ऑफ ह्यूमन बिहेवियर एंड एपलाइड साइंस नई दिल्ली) ने लोगों को संबोधित किया। इस अवसर पर लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि कोविड-19 नई सदी की नई बीमारी है। इसने हमारी शारीरिक और मानसिक सेहत को प्रभावित किया है। लेकिन इसने हमें जीना भी सिखाया है। यह बात सही है कि कोरोना काल में घबराहट और बेचैनी इस कदर बढ़ गई है कि इसका सबसे बुरा असर मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। आज देश का शायद ही कोई व्यक्ति हो, जिसको प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इसने प्रभावित न किया हो। एक स्वस्थ मन ही एक स्वस्थ शरीर में वास करता है, लेकिन मन ही इतना ज्यादा भयभीत हो गया है कि इससे हमारे शारीरिक सेहत पर नुकसान पहुंच रहा है।

यदि विज्ञान की बात की जाए तो कई तरह की मानसिक बीमारियां चरम पर हैं। इनमें प्रमुख है नींद न आना और अनचाहा डर (एनजाइटी डिसऑर्डर)। ये मन में नकारात्मकता को जन्म देती हैं। समस्या यह है कि यदि हमने समय रहते मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान नहीं दिया तो कोरोना काल के बाद भी मानसिक रूप से बीमार हो सकते हैं, अक्सर इसे पोस्ट डिसऑर्डर कहा जाता है। आज यह भी देखने में मिल रहा है कि जिन लोगों को पहले से बीमारी रही है, उनके लक्षणों में इजाफा हो रहा है। एक तरह से बहुत से लोगों में मानसिक बीमारियों की आशंका बढ़ी है। दिल का धड़कना, मुंह का सूखना, हर समय अनजाने डर का सताना, इसके प्रमुख लक्षण हैं। हम सभी को इस समय सबसे पहले यदि कुछ करना हो तो सरकार के हर निर्देश का पालन करना चाहिए । प्रशासन या स्वास्थ्य विभाग कोई भी निर्देश बड़े सोच-विचार और अध्ययन के बाद ही जारी करता है। उनका पालन करते हुए हमें डरना नहीं है। यदि आप सरकार की जानकारियों का अनुसरण करेंगे तो बेवजह की सूचनाओं से दूर रहेंगे। आज सूचनाओं की अधिकता से परेशानी खड़ी हो रही है। आप समय का सदुपयोग करें। आध्यात्मिकता की ओर लौटना चाहिए। मोबाइल और टीवी से अधिक परिवार को समय दें।

         15 मई 2021 शनिवार को माइक्रोसॉफ्ट टीम एप के जरिए आयोजित परिचर्चा में 3165 मोबाइल/लैपटॉप/आईपैड/टीवी स्क्रीन पर 6217 लोग सपरिवार जुड़े।हेल्थ वेबिनार में विदेशों से भी कई लोगों ने उपस्थिति दर्ज कराकर लाभ उठाया। पं. गणेश प्रसाद मिश्र सेवा न्यास के अध्यक्ष डॉ. राकेश मिश्र ने कार्यक्रम का सफलतापूर्वक संचालन किया। न्यास की सचिव श्रीमती आशा रावत ने स्वास्थ्य परिचर्चा में जुड़े सभी गणमान्य जनों, पत्रकारों, छात्र-छात्राओं व महिलाओं का धन्यवाद ज्ञापित किया है। उन्होंने कहा कि हमारे अध्यक्ष डॉ. राकेश मिश्र व श्रीमती प्रमिला मिश्रा की 24 वीं विवाह वर्षगाँठ की अनंत शुभकामनाएँ सभी ने व्यक्त की हैं। उनके प्रति न्यास आभारी है। आशा दीदी ने कहा कि परिवार में होने वाले आयोजन को भी सेवा कार्य के साथ जोड़ना राकेश- प्रमिला- संकल्प से सीखने योग्य है कि वह तीनों दद्दा जी के पदचिह्नों पर चल रहे हैं। न्यास द्वारा आयोजित सभी स्वास्थ्य परिचर्चाओं को न्यास की वेबसाइट www.gpmsevanyas.org पर भी देखा जा सकता है। न्यास के संयोजक डॉ. राकेश मिश्र ने बताया कि जल्द ही एक नए विषय पर स्वास्थ्य परिचर्चा का आयोजन किया जाएगा ।

 स्वास्थ्य परिचर्चा में पूछे गए प्रश्न एवं उनके उत्तर 


 नरेंद्र मिश्रा – कोरोना महामारी के कारण हमारे अपने परिजन जो संक्रमित हैं, उनकी भी देखभाल नहीं कर पा रहे हैं, लगता है हम अपने कर्तव्यों से दूर होते जा रहे हैं?

 डॉ. अमित गर्ग - इसमें आप स्वंय को क्यों दोष दे रहे हैं। कोरोना बीमारी का स्वरूप ही ऐसा है। यह एक दूसरे के संपर्क में आने से बहुत तेजी से फैलता है। चिकित्सक और स्वास्थ्यकर्मियों को इलाज के कार्य में लगाया गया है। लेकिन कहीं-कहीं ऐसे समाचार आते हैं कि मरीज अच्छी देखभाल नहीं प्राप्त कर पा रहे हैं। ऐसे में इस प्रकार के प्रश्न उठ रहे हैं। इसलिए विवेक का इस्तेमाल करते हुए पहले स्वयं को सुरक्षित रखें।


रजनीश- कई साथी डिप्रेशन का शिकार हो रहे हैं, क्या बिना दवाओं के इलाज संभव है?

 डॉ. अमित गर्ग - हमारे जीवन में जो बदलाव हुए, उनके मुताबिक हमारा मन तैयार नहीं था। यह एडजेसमेंट डिसऑर्डर होता है। इन चीजों के लिए दवाएं तब इस्तेमाल की जाती हैं, जब इसका स्तर बहुत बढ़ जाता है। अन्यथा परामर्श और संवाद से ही उपचार किया जा सकता है।


 श्रीराम रिछारिया- वैक्सीन लेने से मानसिक बीमारियों की आशंका जाहिर की जा रही है? 

 डॉ. अमित गर्ग- सरकार के गाइडलाइंस के अनुसार वैक्सीन लगवाएं। वैक्सीन के बाद हल्का बुखार आना, कमजोरी लगना सामान्य लक्षण हैं। वैक्सीन को लेकर ये सभी बातें अफवाह हैं। बच्चों को तो वैक्सीन हम लंबे समय से लगवाते आ रहे हैं।

 आनंद मोहन- नींद न आने की समस्या बढ़ गई है, अच्छी नींद के लिए क्या सलाह है? 

 डॉ अमित गर्ग- नींद एक शांति प्रिय प्रक्रिया है। जैसे ही दिमाग में विचार आने लगते हैं, मन उन विचारों में लीन हो जाता है। हम 21वीं सदी में जी रहे हैं, और हर चीज का समाधान क्षणिक रूप में चाहते हैं। यह प्रवृत्ति ठीक नहीं है। बिस्तर में जाने से पहले हाथ पैर में पानी डाल लें। कुछ पढ़ाई करना चाहिए। बिस्तर में तभी जाएं जब नींद आ रही हो। बिस्तर में लेटने के लिए न जाएं। सोने से ठीक पहले टीवी या मोबाइल न देखें। 


 पुष्पेन्द्र सिंह-कोविड पेशेंट में अनिद्रा देखने को मिलती है, इससे कैसे बचें?* 

 डॉ. अमित गर्ग- कोरोना मरीजों में मानसिक स्वास्थ्य का कोई लक्षण नजर आने पर भी कोरोना का ही प्रमुख इलाज होगा। चूंकि कोरोना मरीजों को खासी की शिकायत सामान्य होती है, इसलिए खांसी की दवाएं ही नींद की समस्या का भी समाधन करेंगी। अतिरिक्त दवाओं की आवश्यकता नहीं होती है।



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