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12 जनवरी पर विशेषांक सेवाभाव के महान साधक पं. गणेश प्रसाद मिश्र

 बुन्देलखण्ड के महान कर्मयोगी दद्दा जी

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सेवा भाव को साकार करता पं. गणेश प्रसाद मिश्र सेवा न्यास

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राष्ट्रीय युवा दिवस पर मैराथन दौड़ आज

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भारत की भूमि समय-समय पर नर और नारायण के बीच नातों को जोड़ने और बताने के लिए विशिष्ट व्यक्तित्व और कर्मयोगी को अवतरित करती रहती है। यह व्यक्तित्व अपनी सोच और समझ के सहारे समाज को नई चेतना देकर विशिष्टता से ओत-प्रोत होता है।  इसी क्रम में भारत के हृदय भाग में अवस्थित बुंदेलखंड क्षेत्र में पं.गणेश प्रसाद मिश्र जैसे व्यक्तित्व का अवतरण हुआ। 18 जुलाई 1924 को भारत माता की धरती ने नौगांव के निकट धवर्रा गांव में ऐसे कर्मयोगी को अवतरित किया। पहली नवंबर 2016 को उनका महाप्रयाण हो गया। भारतीय संस्कृति का संरक्षण और संर्वधन के साथ ही रग-रग में राष्ट्रवाद को लेते हुए पं. गणेश प्रसाद मिश्र ने मानवीय संवेदना के साथ ही सेवाभाव का जो संदेश दिया, वह स्मरणीय है। एक स्वयंसेवक के रूप में, एक साधक के रूप में और एक सुधारक के रूप पं. मिश्र समाज के समक्ष सतत प्रत्यक्ष रहेंगें। कहा गया है कि ‘यस्य कीर्ति, स: जीवति’।  पं.मिश्र अपनी कीर्तियों के कारण आज भी जीवित हैं। हर क्षेत्र में दूरदृष्टि के साथ ही कर्मयोगी वाले व्यक्तित्व बुंदेलखंड में दद्दा जी के नाम से प्रसिद्ध हैं। इक्कीसवीं सदी जिन चीजों को लेकर देश और दुनिया चिंतित है, दद्दा जी ने दशकों पूर्व ही पहल कर दी थी। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रथम पीढी के स्वयं सेवक और प्रचारक पं. मिश्र की  मेधा ऐसी कि गणित और संस्कृत, हिंदी अंग्रेजी  और इतिहास में एक समान अधिकार था। डाक विभाग में अपनी सेवा देते हुए 1948 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर प्रतिबन्ध के दौरान छह मास तक कारावास को झेला तो आपातकाल के दौरान डेढ़ साल तक भूमिगत रहकर लोकतंत्र की रक्षा के लिए चले आंदोलन के सशक्त भागीदार रहे। फिर चिकित्सा के क्षेत्र में अपनी धाख जमाई तो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विस्तार में लगे तो कीर्तिमान स्थापित किया, जिसकी चर्चा राष्ट्रीय स्तर पर होने लगी। आज पूरी दुनिया पर्यावरण संरक्षण के लिए चिंतित है तो पं. मिश्र दशकों पूर्व वृक्षारोपण अभियान चलाकर बुन्देलखण्ड की धरती को हराभरा करने में में महती भूमिका निभायी। 

उनकी स्मृतियों को संजोने, उनके संदेश से समाज को सशक्त बनाने के लिए स्थापित पं. गणेश प्रसाद मिश्र सेवा न्यास, नर सेवा ही नारायण सेवा है। को सार्थक बनाने के लिए सतत अग्रसर है। पं. गणेश प्रसाद मिश्र दद्दाजी के नाम पर शांति मिश्राजी की प्रेरणा से इस सेवाभाव से ओतप्रोत न्यास का गठन 2017 में हुआ था। आज उसने विकास की बुनियादी संरचनाओं से लेकर मानवीय जीवन की आधारभूत सुविधाओं तक, हर क्षेत्र में जो कार्य किया है, वह अन्य क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणास्पद है। दद्दा जी कहा करते थे कि भगवान राम ने सुंदर और संपन्न लंका को जीतने के बाद कहा था कि ‘जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसे’। दद्दा जी नौजवानों को अपने-अपने गांव के लिए कुछ करने के लिए प्रेरित करते रहे। उन्हीं की प्रेरणा का परिणाम है आज न्यास की पहल पर गाँव में यातयात के लिए सड़क, रौशनी के लिए बिजली, पानी, मकान, गैस सिलेंडर, घर-घर में शौचालय, गाँव को ओ.डी.एफ., पावर हाउस, सुलभ शौचालय, खेल का मैदान, गौशाला, मुक्तिधाम, सोलर लाइटों से प्रकाश, मेधावी छात्रों को सामग्री, छात्रवृत्ति, प्रतिभा सम्मान, वर्ष में दो-तीन मल्टी सुपर स्पेशियलिटी हेल्थ चेकअप कैंप जैसे अनेक प्रकल्प संचालित किए जा रहे हैं। अभी तक ग्यारह बड़े स्वास्थ्य शिविर में हजारों लोगों की सेवा हो सकी है। उनको कान की मशीनें व चश्मों का वितरण हुआ है। कृषिप्रधान देश में किसानों को सशक्त बनाने के लिए किया गया कार्य क्षेत्र में चर्चित है। कृषि में आत्मनिर्भर बनाने हेतु मौके पर ही खाद, बीज की जानकारी हेतु प्रशिक्षण, उपयोगी किट वितरण, एक हजार किसानों को पांच-पांच फलदार वृक्षों के पौधे नि:शुल्क देकर आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में उचित प्रयास न्यास के द्वारा किया जा रहा है।

न्यास के माध्यम से अप्रत्यक्ष रूप से दस गाँवों की जनता शासकीय योजनाओं का घर बैठे लाभ ले पा रही है। इसमें वृद्धावस्था पेंशन, गरीबी रेखा के राशन कार्ड, बिजली बिलों के विवाद का हल, खाता-खतौनी, पटवारी से संबंधित कार्य यहीं आसानी से हल हो रहे हैं। गाँव में ही आर्यावर्त बैंक की शाखा से सभी बैंकिंग कार्य सरलता से हो रहे हैं।

आज जिस प्रकार समाज में वैमनस्य बढ़ रहा है, उसे देखते हुए गाँव विवाद मुक्त कैसे बने? इस दिशा में हम कार्य कर रहे हैं। आपको बताते हुए गर्व की अनुभूति होती है कि धवर्रा गाँव में पिछले तीन सालों से कोई भी ऐसा बड़ा मामला सामने नहीं आया है, जिससे पुलिस और कोर्ट के चक्कर गाँव वालों को लगाने पड़ें। यह सब परस्पर सौहार्द का प्रमाण है। गाँव के लोग जिस तरह उत्सव एवं तीज त्योहार सामूहिकता के साथ मनाते हैं, वह आस-पास के दूसरे गाँव और क्षेत्र के लिए अनुकरणीय है। इसी क्रम में न्यास की पहल पर हर दिन प्रातः 5 बजे रामधुन मंडली निकलती है। राम नाम संस्कार देने वाला है। इसे एक वर्ष पूर्ण हुआ है एवं कार्तिक पूर्णिमा को भंडारा हो चुका है।

निरंतर माघमेला एवं कुंभ मेला प्रयागराज में श्री श्री 1008 स्वामी शंकर्षणाचार्यजी महाराज के नेतृत्व में पंडाल लगाकर पूरा नगर बसाया गया। 45 दिनों तक पाँच सौ कल्पवासियों के लिए निवास, भोजन, जलपान व अन्य व्यवस्थाएँ जनसहयोग से नि:शुल्क की गई । इस अवसर पर दो बार स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए गए, जिसमें आँख एवं कान की चिकित्सा जाँच व चश्मा तथा कान के उपकरण वितरित किए गए।

पर्यावरण संरक्षण के लिए ‘पॉलीथिन मुक्त भारत’ अभियान को बढ़ावा देने के लिए न्यास ने अब तक दस हजार से अधिक कपड़े के बड़े थैले वितरित किए हैं। यह अभियान निरंतर जारी है ।

संस्कृत भाषा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बारहवीं कक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त करनेवाले छात्र-छात्राओं को दस हजार रुपए नकद, प्रमाण–पत्र व स्मृति चिह्न से विगत दो वर्षों से सम्मानित किया जा रहा है। नौगाँव नगर की रामलीला में न्यास ने घोषणा की है कि शहर के पॉलोटेक्निक, इंजीनियरिंग व डिग्री कॉलेज के प्रतिभावान छात्रों को दशहरा उत्सव के समय रामलीला मंच पर सम्मानित किया जाएगा। कृषि प्रशिक्षण हेतु एक वैज्ञानिक नियुक्त किया है, जिसके द्वारा समय-समय पर किसानों को दवा, बीज व उन्नत खेती के बारे में जानकारी दी जाती है ।

विश्व महामारी कोविड-19 के प्रारंभ होते ही न्यास के कार्यकर्ता सक्रिय हो गए। सतना नगर में 22 मार्च से जनता कर्फ्यू में रेल व सवारी वाहन बंद हो जाने से कार्यकर्ताओं ने स्वयं भोजन बनाकर भटके हुए यात्रियों को न केवल भोजन कराया अपितु उनको अपने-अपने घरों तक पहुँचाने की लगातार व्यवस्था की। न्यास के कार्यों से प्रभावित होकर बाद में नगर के अन्य स्वयंसेवी संगठन सक्रिय हुए।

धवर्रा गाँव से प्रारंभ यह सेवा का बीज आज उत्तर प्रदेश, मध्यव प्रदेश एवं दिल्ली के अनेक स्थानों पर पल्लवित-पुष्पित हो रहा है। इन स्थानों पर कार्यकर्त्ता सेवा कार्यों में लगे हैं। आज प्रयागराज, सतना, छतरपुर, नौगाँव, धवर्रा, रुरावन कलाँ (बंडा), सागर, दिल्ली में अनेक कार्यकर्ता सक्रिय होकर नि:स्वार्थ भाव से इन सेवा कार्यों में लगे हैं। धीरे-धीरे यह राष्ट्रीय क्षितिज पर स्थापित होने के लिए अग्रसर है। 

जहाँ गाँव के नौजवानों की टोली ने प्रत्येक कार्य में अतुलनीय योगदान किया, वहीं शासकीय टीम पूरे मनोयोग से लगकर आज भी नए-नए विषय सोच रही है। वर्तमान जिलाधिकारी ने गाँव में चौपाल लगाकर, मौके पर जिले के अधिकारियों को भेजकर गाँव वासियों की समस्याओं का समाधान किया। गाँव में एक गौशाला एवं मोक्षधाम का निर्माण हो चुका है। सभी गरीबों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्का भवन देने, आयुष्मान भारत कार्ड देने तथा हर खेत तक बिजली एवं पेयजल के स्थायी समाधान की ओर उनका निरंतर ध्यान है।

‘सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया’ के भाव की जागृति के लिए चौबीस प्रकार के खेलों की सुविधा से युक्त खेल परिसर का लोकार्पण 29 अक्तूबर को पूज्य दद्दाजी की तृतीय पुण्यतिथि के अवसर पर हो गया है। आज यह प्रतिमा नई पीढ़ी को आशीर्वाद दे रही है। यहाँ एक साथ सैकड़ों नौजवान अभ्यास करते हैं। आयुर्वेद के देवता भगवान् धनवन्तरिजी के चित्र को आसपास के दस गाँवों के सभी घरों तक वितरित किया गया है, जिससे सभी स्वस्थ बनें, निरोगी बनें। मध्य प्रदेश सरकार ने दद्दाजी के शैक्षिक कार्यों का सम्मान करते हुए स्व. गणेश प्रसाद मिश्र स्मृति शासकीय हाईस्कूल, मानपुरा, विकासखंड-नौगाँव (छतरपुर) में प्रारंभ कर दिया है। न्यास के सदस्य दिव्यांशु मिश्र ने एक एकड़ भूमि विद्यालय निर्माण के दान दी। इसका परिणाम है कि आज ग्रामीण क्षेत्र के सैकड़ों छात्र इससे लाभान्वित हो रहे हैं, जो देश के भविष्य का निर्माण करेंगे।

राष्ट्रीय युवा दिवस पर 12 जनवरी 2021 को बुन्देलखण्ड मैराथन दौड़  का आयोजन किया गया है, यह अपने आप में एक अभिनव प्रयास है, क्योंकि यह दौड़  30 किलोमीटर का है। एकसाथ तीन स्थानों से यह दौड़ आरम्भ होगा। पं. बाबूराम चतुर्वेदी स्टेडियम छत्तरपुर से 30 किलोमीटर, महाराजा छत्रसाल शौर्यपीठ से दस किलोमीटर तथा नवोदय विद्यालय नौगाँव से सात किलोमीटर का दौड़ आरंभ होगा। इस दौड़ आयोजन का समापन पं.गणेश मिश्र खेल परिसर धवर्रा (नौगांव) महोबा में होना है। न्यास की सांगठनिक क्षमता, समर्पण भाव और सक्रियता का परिणाम है कि आज यह न्यास समाज और देश के स्तर पर सेवाभाव, सामाजिक सद्भाव, सांस्कृतिक चेतना के साथ ही राष्ट्र की प्रगति के लिए स्वयं सक्रिय है और अन्य को भी प्रेरित कर रहा है। न्यास का यह अनुपम प्रयास जहां पं. गणेश प्रसाद मिश्र जैसे कर्मयोगी का स्मरण करने की हमारी सनातन परंपरा में पूर्वजों का स्मरण कराता है। इसके साथ ही उनसे मिली प्रेरणा से प्रेरित होकर नई पीढी को आगे बढ़ने का मार्ग सुगम कर रहा है, वहीं समाज और राष्ट्र में सेवाभाव का अलख जगाकर ‘सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास’ के सूत्रवाक्य को पुष्ट करता है। मुझे इस बात पर संतोष है कि न्यास के अध्यक्ष के रूप में मैं अपनी सेवा दे रहा हूं तथा न्यास के माध्यम से सेवाभाव की निरंतरता बनी हुई है। आज आवश्यकता है कि हर नौजवान अपने-अपने गांव के विकास के लिए कुछ न कुछ करे।


ऐसे महामानव को विनम्र श्रद्धांजलि!


डॉ. राकेश मिश्र,

*(अध्यक्ष) 

पं. गणेश प्रसाद मिश्र सेवा न्यास



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