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पं.गणेश प्रसाद मिश्र सेवा न्यास द्वारा महिलाओं की स्वास्थ्य परिचर्चा में समस्याओं का मिला समाधान

सतना/छतरपुर/नई दिल्ली। पं गणेश प्रसाद मिश्र सेवा न्यास द्वारा कोरोना महामारी के दौरान  स्वास्थ्य एवं जीवनशैली से जुड़े विषयों पर देश के सुप्रसिद्ध चिकित्सा विशेषज्ञों के साथ परिचर्चाओ का आयोजन किया जा रहा है। इसी क्रम में 24 जुलाई 2020 शुक्रवार को सप्तम स्वास्थ्य परिचर्चा का आयोजन महिलाओं की स्वास्थ्य समस्याएं और निदान विषय पर किया गया। इस विषय पर देश की सुप्रसिद्ध महिला रोग विशेषज्ञ डॉ दिव्या नागपाल गुप्ता जी ने अपने विचार रखते हुए महिलाओं की जिज्ञासाओं का सरल भाषा में समाधान किया। उल्लेखनीय है कि डॉ दिव्या नागपाल ने इंदौर के चौइथराम हॉस्पिटल से हाईरिस्क प्रेगनेंसी में प्रशिक्षण लिया है। इनके द्वारा प्रस्तुत रिसर्च पेपर ‘गर्भ संस्कार’ एक अंतरर्राष्ट्रीय सेमिनार में पुरस्कृत किया जा चुका है। इसके साथ ही आप किशोर बालिकाओं (13-17 वर्ष) में होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं की विशेषज्ञ डॉक्टर हैं।

पं. गणेश प्रसाद मिश्र सेवा न्यास द्वारा,महिलाओं के स्वास्थ्य पर,महिला डॉक्टर द्वारा संबोधित एवं महिला द्वारा ही संचालित हुई परिचर्चा में अपने विचार रखते हुए डॉ दिव्या नागपाल गुप्ता जी ने कहा कि महिलाएं परिवार और समाज का केंद्र होती हैं, वह एक ऐसी धुरी होती हैं जिसके चारों ओर हमारा परिवार विकसित होता है। इसलिए महिलाओं को स्वयं और समाज को भी उनके स्वास्थ्य को लेकर जागरुक होना पड़ेगा। महिलाओं को उनकी अटूट शक्ति और क्षमताओं के विषय में बतलाना होगा।

उन्होंने कहा कि मैं घर की महिलाओं से विनम्रतापूर्वक कहना चाहूंगी कि आप अपने लिए हर दिन एक घंटा निकालें। उस एक घंटे में कोई भी व्यायाम करें। यह एक घंटा आपका अपना होना चाहिए। 40-45 मिनट अनिवार्य रूप से खुली हवा में टहलिये।योग व व्यायाम अवश्य करें। आपका अपने आप से वार्तालाप होना बहुत आवश्यक है। आप सकारात्मक विचारों को आत्मसात करें। इसके साथ ही आप जिस प्रकार से घर के अन्य सदस्यों की सेहत को लेकर ध्यान देती हैं, उन्हें पौष्टिक आहार प्रदान करना सुनिश्चित करती हैं, उसी तरह अपने शरीर को भी पौष्टिक आहार प्रदान करें। प्राय: देखने में आता है कि महिलाएं जो भोजन घर में बचा होता है उसे ही खा लेती हैं। दूध -दही आदि का नियमित रूप से सेवन करें। आध्यात्मिक कार्यों में भी समय लगाएं। व्रत शारीरिक क्षमता से अधिक न करें, क्योंकि इससे एसिडिटी आदि की आशंका भी बढ़ जाती है। शारीरिक स्वास्थ्य के साथ मानसिक स्वास्थ्य को भी मजबूत करें। किसी भी प्रकार की शारीरिक समस्या होने पर तत्काल चिकित्सक के पास जाना चाहिए। अब समय आ गया है कि आप अपने बारे में अवश्य सोचें। वेबिनार में 1714 फ़ोन व लैपटॉप से महिलाएं और प्रबुद्धजन देश के कोने-कोने से जुड़े। इस परिचर्चा में 256 प्रश्न प्राप्त हुये, जिनका श्रीमती प्रमिला मिश्रा द्वारा कार्यक्रम में सफलतापूर्वक संचालन किया गया। इनमें अधिकांश प्रश्नों का उत्तर डॉ दिव्या नागपाल के प्रारंभिक उद्बोधन में ही मिल गया। वहीं कई विशिष्ट प्रश्नों व जिज्ञासा का समाधान उन्होंने संवाद सत्र में दिया। कार्यक्रम में पं गणेश प्रसाद मिश्र सेवा न्यास के अध्यक्ष डॉ राकेश मिश्र भी उपस्थित रहे। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि भविष्य में निरंतर महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़े विषयों पर वेबिनार का आयोजन किया जाता रहेगा। न्यास की सचिव श्रीमती आशा रावत ने वेबिनार को सफल बनाने के लिए सभी महिलाओं और प्रबुद्धजनों का आभार प्रगट किया।

वेबिनार में पूछे गए विशिष्ट प्रश्न व डॉ. दिव्या नागपाल गुप्ता द्वारा दिए गए उत्तर

प्रश्न – पेशाब के मार्ग में जलन की वजह क्या है? पीरियड्स के दौरान यह अधिक होती है।

*डॉ. दिव्या नागपाल गुप्ता : * 5-55 साल की उम्र तक हर पड़ाव में महिलाएं किसी न किसी स्वास्थ्य विकार से जूझती हैं। पेशाब में जलन, रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने की वजह से होती है। नियमित रूप से नींबू पानी पीने से इससे काफी राहत मिलेगी। हरी मिर्च में भी विटामिन सी होता है, लेकिन इसका अत्यधिक सेवन न करें। सब्जियों में तोड़कर हरी मिर्च डालें। पानी का अत्यधिक सेवन करें। किसी भी स्थिति में बार-बार पेशाब रोकना ठीक नहीं है। पेशाब जाने के बाद आंतरिक अंग को साफ पानी से धो लें और सूखे साफ-सुथरे कपड़े से साफ करें। इससे संक्रमण नियंत्रित होगा। एक अच्छे स्त्री रोग विशेषज्ञ की सलाह इसमें ली जा सकती है।

प्रश्न : माहवारी से पहले चेहरे पर फुंसियां क्यों हो जाती हैं?

*डॉ. दिव्या नागपाल गुप्ता : * माहवारी से पहले हमारे शरीर में एक हॉर्मोन्स तेजी से स्रावित होता है। यह हमारे शरीर में बदलाव लाता है। माहवारी से पहले 150 प्रकार के लक्षण चिकित्सा विज्ञान में बताए गए हैं। यदि यह लक्षण स्थायी रूप से हों तो चिकित्सक को दिखाना चाहिए।

प्रश्न : पीरियड्स के दौरान तीन से पांच दिन तक बहुत दर्द होता है, सिर्फ एलोपैथिक दवाओं से ही ठीक होता है, इससे कोई नुकसान तो नहीं है?

डॉ. दिव्या नागपाल गुप्ता : यह सामान्य रूप से  होता है। माहवारी शुरू होने के बाद दवाई लेने के बजाय यदि दो दिन पूर्व दवाएं लें तो ज्यादा ठीक रहेगा। छोटे-छोटे घरेलू इलाज से भी ठीक होता है। आजवायन को सेंक लें, इसे पानी के साथ ले सकते हैं। मूत्र विकारों के लिए आजवायन काफी मददगार होती है। हां, ध्यान रखें कि दिन में एक बार ही इसका सेवन करें। दवाएं कोई भी नुकसान नहीं करतीं बशर्ते डॉक्टर के परामर्श के अनुसार ली जाएं।

प्रश्न : 40 साल की उम्र के बाद महिलाओं को क्या अलग से दवाएं और टॉनिक लेने की आवश्यकता होती है? कई बार कुछ काम करने का मन नहीं होता इसका क्या कारण हो सकता है?

डॉ. दिव्या नागपाल गुप्ता : काम करने का मन नहीं करने के कई कारण हो सकते हैं। 40 साल की उम्र में हमारा शरीर इसलिए थकान महसूस करने लगता है क्योंकि पहले शरीर रूपी मशीन का ध्यान नहीं रखा गया। अर्थात शरीर रूपी मशीन को भी आवश्यक पोषक तत्व देना चाहिए। पहले हम पर्याप्त मात्रा में धूप लेते थे। आजकल धूप का सेवन नहीं करने से विटामिन डी नहीं मिल पाता है। शरीर के पोषक तत्वों की कमी के लिए विटामिन सी, डी और बी की दवाएं लेना चाहिए। यदि एक बार आवश्यक चिकित्सकीय जांच करवा लें तो पता चल जाएगा कि कौन-कौन से पोषक तत्वों की शरीर में कमी है, उसके अनुसार दवाएं व पोषक तत्व लेना उचित रहेगा।

प्रश्न : 28 साल की उम्र है तीन माह से गर्भवती हूं, अर्थराइटिस भी है तो क्या दवाएं लेते रहना ठीक रहेगा?

डॉ. दिव्या नागपाल गुप्ता : कुछ दवाएं बिल्कुल सुरक्षित होती हैं,कुछ दवाओ में स्टीरोइङ्स होती है इसलिए डॉक्टर के सुझाव पर दवाएं ले सकते हैं। बेहतर होगा कि अर्थराइटिस का समुचित इलाज प्रेगनेंसी के बाद करवाएं।

प्रश्न : क्या आपको नहीं लगता है कि प्राइवेट हॉस्पिटल अधिकांश मामलों में आवश्यकता न होने पर भी प्रसव के दौरान ऑपरेशन को प्राथमिकता देते हैं?

डॉ. दिव्या नागपाल गुप्ता : बहुत अच्छा प्रश्न है, क्योंकि आजकल यह चर्चा का विषय है। देखिए, आजकल मेडिकल साइंस इतनी तरक्की कर चुका है कि हमें शरीर के भीतर हो रहे बदलावों की हर जानकारी पता चल जाती है, इसलिए उसके अनुसार इलाज संबंधी निर्णय लिए जाते हैं। जैसे, अंदर पानी कम है या ज्यादा, बच्चे की नाल पैर तक फंसी है, या बच्चा मार्ग से निकल कर आ पाएगा या नहीं। ऐसी अनेक स्थितियों की जानकारी हमें सोनोग्राफी के माध्यम से पता चलती है। प्रसव सामान्य नहीं होने की स्थिति में सिजेरियन अर्थात ऑपरेशन को प्राथमिकता दी जाती है। मैं खुद डॉक्टर हूं बावजूद मेरे तीनों बच्चे सिजेरियन से हुए। मैं और मेरे बच्चे स्वस्थ हैं। इसलिए इस भ्रांति को मन से निकालना चाहिए।

प्रश्न : 14 वर्ष आयु है, 10 वर्ष की आयु से ही पीरियड्स शुरू हो गए थे, वजन लगातार बढ़ रहा है?क्या करूँ।

*डॉ. दिव्या नागपाल गुप्ता : * खान-पान और व्यायाम से अपनी जीवनशैली को अनुशासित करें। कुछ व्यायाम करना नहीं आता है तो सीढ़ियों से चढ़ना-उतरना और घर में छोटे-छोटे व्यायाम करें। इससे पीरियड्स सामान्य हो जाएंगे, यदि फिर भी ठीक न हो तो डॉक्टर को दिखाएं।

प्रश्न : बच्चेदानी को किन परिस्थितियों में निकालना अनिवार्य हो जाता है?

*डॉ. दिव्या नागपाल गुप्ता : * भगवान ने जिस रूप में शरीर की रचना बनाई है, उसमें किसी तरह की छेड़छाड़ तब तक नहीं करनी चाहिए जब तक बहुत अनिवार्य न हो। गांठ बड़ी हो या रक्तस्राव अधिक होने जैसी परिस्थितियों में  ही इसे निकालना होता है। अनेकानेक महिलाएं बच्चेदानी का ऑपरेशन कराकर स्वस्थ हैं।

प्रश्न : प्लेटलेट्स बढ़ाने के कोई उपाय हैं क्या?

*डॉ. दिव्या नागपाल गुप्ता : * अच्छा खानपान के अलावा कोई भी विकल्प नहीं है। हरी सब्जियों का सेवन और अंकुरित अनाज का अधिक से अधिक सेवन करें।

प्रश्न : बच्चादानी एक स्थान से दूसरे स्थान पर खिसक गई है, रक्त स्राव अधिक होता है और सूजन है?

*डॉ. दिव्या नागपाल गुप्ता : * बच्चादानी यात्रा नहीं करती है, इसलिए आपका यह कहना ठीक नहीं है।बच्चादानी अपने स्थान पर ही रहती है। रक्तस्राव और सूजन के कारणों को जानना होगा।

प्रश्न : हीमोग्लोबिन चाहकर भी 10 से अधिक नहीं बढ़ पाता है, क्या करें?

*डॉ. दिव्या नागपाल गुप्ता : * हेमेटोलॉजिस्ट को दिखाना चाहिए।

प्रश्न : पीरियड्स देर से आने की वजह पति के साथ शारीरिक संबंध बनाने का अंतराल भी अहम कारक होता है क्या?

डॉ. दिव्या नागपाल गुप्ता : दोनों में कोई समानता नहीं है। पीरियड्स देर से आना एक सामान्य बात है। कोई बहुत बड़े शारीरिक बदलाव दिखें तो किसी अच्छे स्त्री रोग विशेषज्ञ को दिखाना चाहिए।

प्रश्न : प्रेग्नेंसी के दौरान अस्थमा हुआ था, जिससे अब बच्चों को भी अस्थमा हो गया है, क्या निदान है?

डॉ. दिव्या नागपाल गुप्ता : प्रेग्नेंसी के दौरान होने वाला अस्थमा आपके बच्चों में नहीं आता है। यह आपके परिवार में पहले से रहा होगा। यदि सिर्फ आपको प्रेग्नेंसी में अस्थमा हुआ हो तो आपके बच्चों में नहीं आएगा। बच्चों के अस्थमा को ठीक किया जा सकता है, वह भी व्यायाम के जरिए। हालांकि यह व्यायाम सामान्य स्थिति से कुछ अधिक समय तक किया जाना चाहिए।

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