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प्रसंगवश : अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस (08 मार्च) पर विशेष

 मातृ शक्ति-राष्‍ट्र शक्ति: मोदी सरकार में आधी आबादी की मजबूती हेतु प्रयास:  

* डॉ. राकेश मिश्र

पूर्व प्रदेश अध्यक्ष, अ.भा.वि.प.

 

“जननी सम जानहिं पर नारी, तिन्ह के मन सुभ सदन तुम्हारे”। गोस्वामी तुलसी दास जी की इन पंक्तियों से स्पष्ट है कि भारतीय संस्कृति में महिलाओं का कितना अधिक सम्मान है । यहां तो मान्यता है कि जहां नारी पूजित होती हैं, वहां देवताओं का वास होता है। आज अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस है, इसे मनाने का सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य महिलाओं और पुरुषों में समानता लाने के लिए जागरूकता लाना है। साथ ही महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना है। किसी भी समाज के विकास का सीधा सम्बन्ध उस समाज की महिलाओं के विकास से जुड़ा होता है। महिलाओं के विकास के बिना व्यक्ति, परिवार और समाज के विकास की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। आज भी कई देशों में महिलाओं को समानता का अधिकार प्राप्त नहीं है। यह दिन महिलाओं के अधिकारों के लिए आंदोलन का प्रतीक है। संयुक्त राष्ट्र संघ ने वर्ष 1977 में इस दिवस को मनाना शुरू किया था। वैसे पहला अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस वर्ष 1911 में ऑस्ट्रिया, डेनमार्क, जर्मनी और स्विटज़रलैंड में मनाया गया था। "अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस" को पूरे विश्व में अलग-अलग तरह से मनाया जाता है। यह एक ऐसा दिन बन गया है, जिसमें हम समाज, राजनीति और अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में महिलाओं की प्रगति को याद करते हैं।

श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में भाजपा की सरकार आने के बाद महिलाओं के विकास के लिए सरकार ने अनेकों योजनाओं की शुरुआत की, जिससे आधी आबादी को मजबूती मिली है। जैसे बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, उज्ज्वला योजना, सुकन्या समृद्धि योजना। इन योजनाओं की मदद से महिलाओं की स्थिति उन्नत हुई है। महिलाओं के नेतृत्व वाले सशक्तिकरण को सुनिश्चित करने के लिए मोदी सरकार काम कर रही है। सरकार के कामकाज के हर क्षेत्र में महिलाओं की गरिमा को महत्व दिया जा रहा है। आज जहां 15 करोड़ से अधिक महिलाएं उद्यमी मुद्रा योजना जैसी योजनाओं से आत्मनिर्भर हो गई हैं, वहीं स्थायी कमीशन के साथ महिलाएं सशस्त्र बलों का हिस्सा बन रही हैं। सबसे गरीब महिलाएं जो सुरक्षित एवं स्वच्छता की कमी की समस्याओं का सामना करती थीं, उन्हें 11 करोड़ से अधिक सुरक्षित और स्वच्छ शौचालयों से लाभान्वित किया गया है। उज्ज्वला योजना के अंतर्गत गरीब महिलाओं को मुफ्त एलपीजी गैस कनेक्शन देकर महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा दिया गया है और उनकी सेहत की सुरक्षा की गई है। इस योजना के माध्यम से सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में खाना बनाने में इस्तेमाल होने वाले जीवाश्म ईंधन की जगह एलपीजी के उपयोग को बढ़ावा देकर पर्यावरण को स्वच्छ रखने में महिलाओं की भूमिका को बढ़ा रही है। केंद्र सरकार द्वारा प्रधानमंत्री धनलक्ष्मी योजना गरीब वर्ग और मध्यम वर्गीय महिलाओं के लिए शुरू की गयी है। इस योजना का उद्देश्य महिलाओं को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाना है। जो महिलाएं अपना स्वयं का रोजगार शुरू करना चाहती हैं, उन महिलाओं के लिए स्‍ट्रीट बैंडर ऋण योजना बहुत ही लाभकारी साबित हो रही है। सरकार द्वारा लाभार्थी महिलाओं को ऋण मुहैया कराया जा रहा है।

वर्तमान सराकर के समय में ही महिलाओं को और भी सशक्त और मजबूत बनाने के उद्देश्य से व्यावसायिक सुरक्षा और स्वास्थ्य संहिता के तहत अब महिलाओं को सभी क्षेत्रों में काम करने की इजाजत दे दी गई है। वहीं, कंपनियों को महिला कर्मचरियों के लिए क्रेच और कैंटीन सुविधा मुहैया कराना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके अलावा कंपनी की ओर से 45 वर्ष से ज्‍यादा उम्र की महिला कर्मचारियों को साल में एक बार मुफ्त चिकित्सा जांच कराने की सुविधा मिलेगी। सुरक्षा और सहूलियत को ध्यान में रखते हुए अब महिलाओं के लिए काम के घंटे सुबह 6 बजे से शाम 7 बजे के बीच ही रहेंगे। शाम 7 बजे के बाद अगर काम कराया जा रहा है तो उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी कंपनी की होगी। ओवरटाइम कराने पर दोगुना पारिश्रमिक मिलेगा। पहली बार असंगठित क्षेत्र में काम करने वाली महिलाओं को भी ई.एस.आई. से जोड़ा गया है। सामाजिक सुरक्षा संहिता के तहत महिलाओं के ई.एस.आई. का विस्तार किया गया है। देश के 740 जिलों में ई.एस.आई. की सुविधा उपलब्‍ध कराई गई है। पहली बार असंगठित क्षेत्र में काम करने वाली महिलाओं को भी इससे जोड़ा जा रहा है । अब असम के चाय बागानों या कश्‍मीर के सेबों के बाग में काम कने वाली महिला श्रमिकों को भी इस दायरे में लाया गया है। (कांट्रेक्ट पर काम करने वाली महिला कर्मचारियों को भी ग्रेच्युटी का फायदा मिलेगा। इसके लिए न्यूनतम कार्यकाल की बाध्यता नहीं होगी, जिन्‍हें फिक्सड टर्म बेसिस पर नौकरी मिलेगी, उन्हें उतने दिन के आधार पर ग्रेच्युटी पाने का हक होगा यानी अब पांच साल पूरे करने की जरूरत नहीं है।)

देश की आधी आबादी की भागीदारी सुनिश्चित हो और महिलाएं प्रोत्साहित हों, इसलिए वर्तमान में बुंदेलखंड क्षेत्र पर दृष्टिपात करें तो इसमें केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश तथा मध्य प्रदेश की राज्य सरकारों द्वारा लगातार पहल की जा रही हैं। आत्मनिर्भरता, स्वास्थ्य, प्रशिक्षण से लेकर वित्तीय सहायता तक प्रदान करने का काम हो रहा है, जिससे महिलाएं आत्मनिर्भर तथा विकास की प्रक्रिया में भागीदार बनकर नए भारत के निर्माण में सहभागी बन रही हैं।महिलाओं की स्थिति सुधारने के लिए केंद्र सरकार के साथ योगी सरकार ने कई योजनाओं की शुरुआत की है। समर्थ योजना मोदी सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है, जिसके तहत जरूरतमंद लोगों को विभिन्न प्रकार के वस्त्र उत्पादन के हुनर एवं उससे जुड़े कार्यों के प्रबन्धन के हुनर सिखाये जा रहे हैं, जिससे लोग वस्त्र उद्योग के कामों को दक्षता पूर्वक सीखकर इस इंडस्ट्री में जान फूंक सकें। इससे न केवल वैश्विक वस्त्र कारोबार में भारत की व्यावसायिक हिस्सेदारी बढ़ेगी, बल्कि इसका फायदा आम लोगों को भी मिलेगा। समर्थ योजना महिलाओं के लिए भी काफी बड़ी होगी। इससे महिलाओं को भी रोजगार का अवसर मिलेगा और महिला सशक्तिकरण को भी काफी ज्यादा बढ़ावा मिल सकेगा। बालिका अनुदान योजना को भारत सरकार द्वारा देश की गरीबी रेखा से नीचे आने वाले बीपीएल श्रेणी के परिवारों की बेटियों के विवाह के लिए आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। इसके अंतर्गत अधिकतम दो बेटियों की शादी के लिए  सरकार द्वारा 50,000 रूपये दिये जा रहे हैं। प्रधानमंत्री सिलाई मशीन योजना के अंतर्गत देश की गरीब और श्रमिक महिलाओं को केंद्र सरकार की तरफ से  मुफ्त में सिलाई मशीन प्रदान करने की व्यवस्था की गई है। जिससे देश की महिलायें घर बैठे खुद का  रोजगार शुरू कर सकती है। इसके तहत देश के ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों की आर्थिक रूप से कमज़ोर महिलाओं और श्रमिक महिलाओं को देने का प्रावधान है।

जब भी महिलाओं को प्रेरित करने की बात होती है तो यह पंक्ति अवश्य ही गुनगुनाई जाती है- 

“खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी”। स्वतंत्रता संग्राम में ऐसी वीरता दिखाने वाली वीरांगना की धरती है बुंदेलखंड । वैसे भी बुंदेलखंड का मतलब, महिलाओं के शौर्य, वीरता, त्याग और बलिदान की धरती। सती अनुसुइया के तप, गोस्वामी तुलसीदास की महानता के पीछे खड़ी हुईं रत्नावली के साथ ही खूब लड़ी मर्दानी झांसी वाली रानी के पराक्रम के आगे घुटने टेक देने वाले अंग्रेजों की कहानियों तक बदलाव की बयार में पग-पग पर हमेशा सहभागी रही हैं।

प्रधानमंत्री के जेहन में देश सर्वोपरि है। घर व समाज से लेकर सियासत की चिंता उनके चेहरे पर साफ झलकती है। हरबोले बुंदेलों की तर्ज पर बोलने में हिचक नहीं है। प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की धरती बुन्देलखण्ड में विकास की असली गाथा तब शुरू हुई, जब केंद्र में श्री नरेंद्र मोदी जी, मध्य प्रदेश में शिव राज सिंह चौहान जी और उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ जी की सरकारें आईं । बुनियादी सुविधाओं के अभाव का दंश सबसे अधिक महिलाओं को ही झेलना पड़ता है। भीषण गर्मी, पानी के लिए हाहाकार देखने को विवश आधी आबादी को अब मजबूती मिलने लगी है। इसी क्रम में पं. गणेश प्रसाद मिश्र सेवा न्यास एवं स्थानीय युवाओं की टोली ने आधी आबादी के सशक्तिकरण में अतुलनीय योगदान किया है। वहीं शासकीय टीम ने भी पूरे मनोयोग से सहयोग करते हुए नारी सशक्तिकरण का कार्य किया है। सभी गरीबों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्का भवन देने, आयुष्मान भारत कार्ड देने तथा हर खेत तक बिजली एवं पेयजल के स्थायी समाधान की ओर उनका निरंतर ध्यान है। धवर्रा (नौगांव) महोबा समेत कई गांवों में आज पेयजल, शौचालय, उच्च तापमान से निजात के साथ ही नारी सशक्तिकरण के लिए चलाई गई योजनाओं से मजबूती मिली है। आज इस क्षेत्र की महिलाएं हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं। पोषण आहार : सही पोषण-देश रोशन, महिला शक्ति केन्‍द्र, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, आंगनवाडी मानधन में वृद्धि हो या किशोरी शक्ति योजना हो, यह सब योजनायें मातृशक्ति के सम्‍मान स्‍वरूप स्‍थापित हो चुकी हैं।

वर्ष 2021 के लिए अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के लिए संयुक्त राष्ट्र की थीम “Women in leadership: Achieving an equal future in a COVID-19 world” है। यह कोरोना के दौरान स्वास्थ्य देखभाल श्रमिकों, इनोवेटर आदि के रूप में दुनिया भर में लड़कियों और महिलाओं के योगदान को रेखांकित करती है। भारत में भी इस दिन महिलाओं पर आधारित अलग-अलग कार्यक्रमों का आयोजन होता है। इस अवसर पर नारी शक्ति पुरस्कार के साथ ही उन्हें सम्मान भी प्रदान किया जाता है। यह महिलाओं को सशक्त बनाने के क्षेत्र में किए गए असाधारण कार्यों के लिए दिया जाता है।





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